मन के आँगन में उतरती है
हर सुबह एक नन्ही सी गौरैया
उछलती कूदती
पंखो को फैलाकर अटखेलियां
करती,
न जाने रोज कितने सन्देश लेकर
आती जीवन के....
मै अक्सर उसके साथ खेलती
उसके नन्हे पंखो को सहलाती
उसकी आँखों में झाँकती
ऐसा लगता मानो वह
चहचहाकर मुझसे कहती
तू तोड़ धरातल की बंदिशों को
मेरे पंख भी नए है
और तेरे सपने भी
आ तू मुझे उड़ना सीखा दे
मै भी तुझे पंख पसारना सीखा दूँ
तोड़ बेड़िया
घर की चहारदीवारी से कुछ
आगे बढ़ एक नए
आसमाँ की तरफ..
वह नन्ही गौरैया रोज देती
मुझे जीवन का एक नया
सन्देश~~~~~~
#सुप्रभात
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
बुधवार, 7 अक्टूबर 2015
नन्ही गौरैया
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