जिंदगी के उतार चढ़ाव में जब मन कुछ व्यथित होने लगे...आशा और प्रत्याशा युद्ध की स्थिति उत्पन्न करने लगे...और हृदय में तमाम ज्वार उठने लगे..तब इस युद्ध की स्थिति पर विराम लगाने के लिए लिखने बैठ जाइए...कलम और कागज जीवन के वो मित्र है जो आपकी हर बात को सहजता से सुनते है...यकीन मानिए लिखने से बहुत सुकून मिलेगा..जैसे मुझे मिला..आत्म मन्थन की कुछ पंक्तिया आपके साथ...
बहुत दूर थी मंजिल मेरी और कठिन था रास्ता।
ना कोई पहचान थी और ना किसी से था वास्ता।
तुम मिले और मै चली, मै से फिरमै भी हम हुयी।
मिल गया एक कारवाँ फिर मिल गयी मंजिल नई।
साज सुर सब साथ है गीत सब लब पर सजे।
गम भी सारे मिट गए जब साथ मेरे तुम हँसे।
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