शनिवार, 3 अक्टूबर 2015

एक उड़ान सपनो की

कोई सपने सजाता है आँखो में
तो कोई ठोकर मार कर आगे
बढ़ने की कोशिश करता है
क्या वास्तविक जिंदगी में जीने
के लिए है कुछ इन
सपनो के सिवा...
जीवन में उड़ान की एक सोच
कैसे उभरती है
आखिर सोच भी तो सपनो का
एक हिस्सा ही होता है
हा मैंने सुना है कुछ एक से
जीने का मकसद ही
ख्वाब को पूरा करना है
तो सच तो है ना
बिना सपनो के जीना कैसा
तुम ही कहो क्या
रखा है जीने में इन
सपनो के बिना...
मेरी इन जागती आँखो में
भी पलता है
एक ख्वाब जज्बातों का
रोज निकलता है
जज्बा बनकर
छूता है मन की खामोशियो को
और हँसाता है बेरंग सी
दुनिया को मेरे
फिर क्यों सोचूँ कुछ और मै
चलो आज उड़ान भरती हूँ
मै भी
एक अनुभूति को साथ लेकर
अनन्त आकाश में
पंख पसारे
अपनों के लिए
अपने
सपनो के लिए
बस एक उड़ान...

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