रविवार, 2 अक्टूबर 2016

रूह तंग है

जीवन और मृत्यु
दो ही सत्य है
जीवन का अनुभव कड़वा सा
तीखा सा जहर सा
निकला।
उलझन प्रतिकार सब
बन गए जीवन का
आधार।
मोह माया में क्या रखा है
क्या अपना है
किराए की जिंदगी
किराए का घर
किराए के लोग
कठपुतली सी हो गयी जिंदगी
डोर घुमाने वाला
अब इंसान नही
घर में जो बसता था
अब वो भगवान् नही
तिरस्कार से तंग
जिंदगी बन गयी जंग।।
अब मौत आ
तुझे गले लगा लूँ
तेरे संग गा लूँ
तुझसे लिपट ले
तेरे संग चलना है
रूह को अब चैन नही
किराए की काया में
छीन लो ना साँसे मेरी
क्या रखा है माया में।।

#बेवजह

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