कभी शहद सी मीठी
तो कभी नीम सी कड़वी जिंदगी
महसूस तो होती होगी
जो आँखे रोज हँसती है
मुमकिन है कभी रोती
तो होंगी....
अपनों का प्यार
वक्त के मार पर भारी
पड़ जाता है...
कुछ मिले ना मिले पर
जख्म कुछ हल्का हो जाता है
मैं किस्सा नही हकीकत हूँ
वक्त को देखा है
रंग बदलते
स्वाद बदलते
कभी थमते तो कभी
बिना पंखो के उड़ते...
बोझिल होते तो कभी
सपनो में खोते..
हर रंग हर साँचे में ढलते
हर जेहन में पलते
हा आँखो की नमी से
रीस रीस के निकलते
नीम सी कड़वी जिंदगी को
शहद में बदलते...
सतरंगी सपनों में खोती
तो कभी थक के चूर
होती जिंदगी...
रंग बदलती जिंदगी...
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
मंगलवार, 29 नवंबर 2016
जिंदगी
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