मै आइना ही हूँ एक ठोकर से टूट जाऊँगी। जज्बात नही बिखर के भी निखर जाउंगी।।
सलामतें उनके लिए मांगो जिन्हें जरूरत हो।
मै हूँ एक रूह बांधोगे तो भी भटक जाउंगी।।
हर एक शै से यहाँ उठती है गदर की ज्वाला।
सुलग रही हूँ बस एक फूंक से जल जाउंगी।।
जहाँ में रंज है गम है तो खुमारी भी है यारो।
मिला लो हाथ जो मुझसे तो संवर जाउंगी।।
दबी दबी सी खुश्बू फैलने को आतुर है देखो।
रंजो गम दिल से मिटा दो तो नजर आउंगी।।
दिव्या पाण्डेय (ऋतू)
26-10-2016
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