मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

आखिर क्यूँ

कभी चहकती चिड़िया
आज लाचार सी है
हा समाज का सच ही तो है
जो आज की नारी बीमार सी है...
कभी उसके चहचहाने से
बगियाँ गूंज जाती थी
आज खामोशियो में ही
सदियां बीत जाती है...
कभी रातें छोटी लगती थी
और दिन बड़ी सी लगती थी
अब रातें है सदियों जैसा
और दिन है तिनका तिनका सा
जीना भी अब क्या जीना है
जीवन तो है मरना सा...
जब जब उभरी शक्ति बनकर
तब तब उसका प्रतिकार हुवा
पर सच है जब जब देवी माना
तब तब समाज का उद्धार हुवा
मत भूलो की नारी माता है
जिसने नर की नीव रखी
फिर भी नर के ही कारण क्यों
आज हर नारी है बहुत दुःखी
कभी सीता बनकर हरी गयी
कभी दामिनी सी ठगी गयी
ये रूप बदलता नर ही क्यूँ
क्यूँ काली बनती नारी ना
क्यूँ आखिर क्यों?????

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