मुझसे जलाया ना गया उम्मीदों
के पुरजे सारे।
वफ़ा के नाम पर जिसमे बेवफाई
थी लिखी।।
आसुवो को मिली सजा गिरने की
दरिया में।
खुशियों को मेरे दर्द की दवाई थी
लिखी।।
रहनुमा जीत गया मुझसे मुझे हार
मिली।
सब्र को कब नही यहाँ जगहँसाई थी
मिली।।
खत का लिखना उसे गवारा तो नही था
शायद।
खुदा का शुक्र है की पुरजो की गवाही है
मिली।।
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