जब कोई दर्द गहराता है
तो गजल बनती है
अश्क पलकों में थम जाता है
तो गजल बनती है
नावजिशो का दौर तो
चलता ही रहता है
लेकिन जब कोई बातो से
चोट खाता है तो
गजल बनती है
चंद दर्द के टुकड़े
पैमाने में मिला के पी लूँ अगर
नशा हो जाए
नशा जब दर्द से टकराता है
तो गजल बनती है।
मुस्कुराहट की झुरमुट से
झाक कर देखो
साँस जब काटों से छन के
आये जाए
दिल में एक तड़प से उठे लेकिन
वक्त मरहम लगाता है
तो गजल बनती है।
#शुभ_दिवस_मित्रों
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
बुधवार, 7 सितंबर 2016
मन की बात
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