"यू शुड अवॉयड टॉक्ससिटी "
"ऑलवेज बि पॉजिटिव "
ऐसा एक हमारे एक मनोविज्ञान के मित्र ने हमें कहा जब ये सुना की हम कुछ वक़्त से एंग्जायटी और डिप्रेशन में गुज़र रहे है...हमने उनसे ये कहा की
"आई ऍम ट्राइंग माय बेस्ट " और थोड़ा मुस्कुरा लिया
फिर सोचा की जीवन में सकारात्मक तो रहना चाहते है, मगर हमेशा ऐसा मुमकिन कहाँ हो पाता है..
अधिकतर लगाव या अटैचमेंट कभी कभी एडिक्शन में भी बदल जाती है और उसका असर हम पर बहुत बुरा तरह से दिखता है.. वो लगाव भले ही किसी चीज़ से हो या किसी इंसान से.. मगर जब उसमे टॉक्ससिटी आजाये यानी की नकारात्मकता आ जाए फिर उसे हमें तुरंत ही त्यागना चाहिए या डिटेचमेंट का प्रोसेस शुरू कर देना चाहिए...
क्यूँकि भले ही वह कुछ वक़्त के लिए तुम्हें खुशी दे रहा हो, या ग़म देगा मगर दिमागी तौर पे वह बहुत बुरा असर छोड़ जाता है, जो की शरीर के लिए हानिकारक होता है...
मैं इसी वजह से बहुत प्रयास करती हूँ खुद को पॉजिटिव रखने की और नेगेटिविटी से खुद को दूर रखने की..मेरी कोशिश ये रहती है की मैं खुद को उन लोगों में शामिल करुँ जिनसे मुझे पॉजिटिव वाइब्स आती हो...ताकि ये आगे चलके मेरे लिए कोई समस्या ना बन सके और दिमागी तौर पे मैं सुकून से रह सकूँ।
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