जिस रोज धरा पर हर इंसा मुस्कुराएगा।
जिस रोज आकाश पर परिंदा गायेगा।
जिस रोज मेरे सुर में तू सुर मिलाएगा।
जिस रोज ख़ुशी हरसू यूँ बिखर जाएगा।
उस रोज मेरे नग्मों का अंदाज देखना।
मेरी आवाज में एक नई आवाज देखना।।
जिस रोज़ हर पेट को रोटी मिल जायेगी ।
जिस रोज़ हर चेहरा हँसता नज़र आयेगा ।
जिस रोज़ नंगे बदन कपड़ों से ढके होंगे ।
जिस रोज़ खुशियों में वतन डूब जायेगा ।
उस रोज़ मेरे नग्मों का अंदाज़ देखना ।
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना ।।
जिस रोज पराये भी हम सबकेे होंगे।
जिस रोज पुरे सबके आखो केे सपने होंगे।
जिस रोज महका महका सा चमन होगा।
जिस रोज सबका अपना गगन होगा।
उस रोज मेरे नग्मों का अंदाज देखना।
मेरी आवाज में एक नई आवाज देखना।।
शुभ रात्री मित्रों
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