शुक्रवार, 19 जून 2020

ये तन्हा रात है

ना प्रियतम का साथ है
ना उभरे कोई जज्बात हैं,
बस मै हूँ ..सिर्फ मै
और ये तनहा रात है।

ना तारें हैं टिमटिमाने को 
ना चाँद है गुनगुनाने को 
बस स्याह अकेली रात है 
मन मेरा बहलाने को 
ना होठों पर है हंसी
ना आंसुओ की सौगात है 
बस मै हूँ ..सिर्फ मै 
और ये तनहा रात है ।

ना स्याही है कलम में,
आक्रोश के शब्द बहाने को
ज़ज्ब कर गया कोरा कागज़ ,
दिल के सारे फसानो को
ना ख़ुशी से कोई उमंग ,
ना गमो का एहसास है ..
बस मै हूँ ..सिर्फ मै
और ये तनहा रात है ।

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