आत्महत्या या मर्डर
मिस्ट्री सॉल्व नही हुई और तबतक कुछ नही कहा जा सकता जबतक इसपर खोजबीन न हो जाये..सुशांत सिंह राजपूत का इस तरह से जाना पूरे देश के लोगो के लिए एक सदमा से कम नही..मैं ये तो नही कह सकती कि ये पूरी तरह से आत्महत्या है क्योंकि अभी समाचारों और उनके प्रियजनों से जो सुना वो सुनकर कत्तई विश्वास नही होता कि इतना जिंदादिल और लगातार कामयाबी की सीढ़ी चढ़ने वाला हँसमुख सुशांत आत्महत्या कर लेगा।
अगर ये आत्महत्या है तो मैं बहुत चिंतित हूँ ये युवा पीढ़ी का कैसा कैसा भटकाव है जो दिल और दिमाग पर इस तरह से हावी हो जा रहा कि वो अपनी वास्तविकता को भूल जा रहे...पैसा कामयाबी मन के भटकाव का सोर्स तो नही...मुझे दुःख है समाज के इस नए सोच पर की नए आसमान को छूने की जो सीढ़िया वो बनाते है उसमें छड़ गिट्टी बालू सीमेंट सब अवसाद के होते है...हालांकि कामयाबी की सीढ़ी चढ़ने के आरम्भ में उन्हें सिर्फ और सिर्फ अपनी मंजिल दिखती है पर वो रास्ता कैसा है इसका ज्ञान नही होता..पर जब होता है तब शायद वो अवसाद के बोझ के नीचे पूरी तरह दब गए होते है।
मेरा एक निवेदन है आजकी युवा पीढ़ी से कामयाबी के रस्ते ऐसे बनाओ की भविष्य में किसी तरह के बोझ को उतारने जैसा न हो किस्मत और भाग्य दोनो ही अटल सत्य है लाख प्रयास करने के बाद मंजिल न मिल पाए तो दूसरे रास्ते पर चलने की जरूरत है
अवसाद या निराशा कभी नई मंजिल नही दिखाती वो दिखाता है तो अंतिम रास्ता..और कामयाब हो गए तो उस हद तक मत जाओ जो तुम्हारी सोच और हैसियत से परे हो वो भी अंतिम मार्ग ही दिखायेगा...दुःख जीवन मे कुछ ही पल के लिए आता है लेकिन अवसाद पूरी जिंदगी तबाह कर देता है दो दिन के दुख के लिए पूरी जिंदगी दांव पर लगाना ये उचित नही...सुशांत के मृत्यु की वजह जो भी हो पर युवा पीढ़ी के लिए एक सबक है कि परिस्थितिया किसी की दास नही इसे अपने अनुकूल बनाना पड़ता है एक सुखद अंत के लिए।
धन्यवाद
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