कैसा आसमान देखा
सोया हुवा जमीर और
गिरता हुवा इंसान देखा
सुख के खातिर चीर हरण
और गिरता हुवा ईमान देखा
नारी की चीत्कार पर
हँसता हुवा ईमान देखा।
दौलत की दौड़ में
भागता हुवा बेईमान देखा
भाई भाई का नही
बहन की विसात क्या
रिश्ते पैसे पर टिकी
बिन दौलत के औकात क्या
सच आँखियो का तजुर्बा देखो
देखा सब पर चुप
आज भी गुमसुम
कल भी चुप चुप
#ये_कलयुग_है_भाई
#शुभरात्री
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