क्या तुम्हें पता है
मन की भी एक देह होती है जो
स्पर्श की भूखी होती है
कुछ ख्वाहिशें ऐसी भी होती हैं
जिनकी चाहत हमेशा रहती है
और तुम्हारा स्पर्श.. आयु से परे
बेपनाह खूबसूरती का एहसास कराता है
यूं तो तुमने मुझे छुआ भी नहीं
पर तुम्हारा यह अनछुआ स्पर्श
मुझे अंदर तक सर्दियों में
भी पिघला देता है...
ऐसा लगता है..
जैसे कहीं यह स्पर्श
दरखत सा बढ़ रहा है
और मैं बूंद.. सागर से लड़ती हुई सी
प्रेम में लिपटे इस स्पर्श की भाषा
कहीं अंदर रूह तक छू जाती है
पर इतना तो जानती हूं
यह प्रेम से विरह.. आंसू से खुशी तक
भावनाओं से स्पर्श तक की यात्रा
कभी देखी नहीं जाती बल्कि
मन से महसूस की जाती है
वैसे ही जैसे.. धरती आकाश
कभी मिलते नहीं.. कोई स्पर्श नहीं
पर स्नेह और संबंध का
क्षितिज सीमांत.. से सुंदर कोई
और उदाहरण ही नहीं..
उदाहरण ही नही..
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