शुक्रवार, 4 मार्च 2016

तुम

तुम अटल हो
सत्य हो
सौभाग्य हो
तुम स्नेह से पूरित
मेरे विचारो की अभिव्यक्ति हो
मेरे हृदय में उपजी आशाओ
का तुम एक साकार रूप हो
मुझपर लगे प्रश्नचिन्हों
का विराम हो....
अतीत के काली अंधियारी
रातों के काले बादल को
चीर कर जब तुमने मुझे
नया सबेरा दिया
यकीन मानों मेरे आँखों
से ख़ुशी की जो लहर आई
उनसे धूल गयी
जीवन पर लगे वो सारे काले
धब्बे सच..
मैं फिर से बढ़ रही हूँ
सौभाग्य ख़ुशी इच्छावों
आशाओं और उम्मीदों
की चादर समेटे
अपने भविष्य की तरफ
धीरे धीरे हौले हौले..
बस एक दुवा करना तुम
सिर्फ मेरे लिए
की मेरी हर दुवा में तुम
रहना .
इस जनम,उस जनम,हर जनम
और जनम जनम..

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