तुम अटल हो
सत्य हो
सौभाग्य हो
तुम स्नेह से पूरित
मेरे विचारो की अभिव्यक्ति हो
मेरे हृदय में उपजी आशाओ
का तुम एक साकार रूप हो
मुझपर लगे प्रश्नचिन्हों
का विराम हो....
अतीत के काली अंधियारी
रातों के काले बादल को
चीर कर जब तुमने मुझे
नया सबेरा दिया
यकीन मानों मेरे आँखों
से ख़ुशी की जो लहर आई
उनसे धूल गयी
जीवन पर लगे वो सारे काले
धब्बे सच..
मैं फिर से बढ़ रही हूँ
सौभाग्य ख़ुशी इच्छावों
आशाओं और उम्मीदों
की चादर समेटे
अपने भविष्य की तरफ
धीरे धीरे हौले हौले..
बस एक दुवा करना तुम
सिर्फ मेरे लिए
की मेरी हर दुवा में तुम
रहना .
इस जनम,उस जनम,हर जनम
और जनम जनम..
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
शुक्रवार, 4 मार्च 2016
तुम
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें