शनिवार, 2 मई 2020

घर मे रहे सुरक्षित रहे

धर्म का अर्थ होता है धारण करना अर्थात जो कुछ भी हम धारण करते है वही धर्म है तो फिर धर्म को लेकर ये विवशता कैसी की मस्जिद में नमाज नही पढोगे तो अल्लाह ताला नाराज हो जाएगा या मंदिर में दिए नही जलाओगे तो ईश्वर नाराज हो जाएगा ये मत भूलो की कुरान हो या पुराण मानवता की सेवा के लिए लिए ही लिखा गया एक धर्म ग्रंथ है कहि भी किसी भी धर्म मे कट्टरता का जिक्र नही है...
  हमने जो चाहा उसी हिसाब से अपने धर्म को  बना लिया जो कि गलत है कबीर दास जी ने सही ही लिखा था..
   कंकर-पत्थर जोरि के  मस्जिद लई बनाय,
   ता चढ़ि मुल्ला बांग दे का बहरा भया खुदाय।।
  नही ना फिर क्यों नही मानते कठिन समय मे धैर्य के साथ धर्म का निर्वहन करना ही सभी धर्मों का सार है।
उन्होंने हिन्दू धर्म पर भी कटाक्ष किया है जिसे अगर सोचा जाए तो सही भी है-

पाथर पूजें हरि मिलें तो मैं पूजूं पहाड़,
 घर की चाकी कोऊ ना पूजे जाका पीसा खाए।
बिना मंदिर गए घर को ही मंदिर बना ले तो क्या इससे हिन्दू धर्म की गरिमा खत्म हो जाएगी।
 अभी समय कठिन है कुछ नही तो उनके ऊपर ही दया करो जो तुम्हारी जान के हिफाजत के लिए दिन भर धूप में जलते है वो तुम्हारे भी धर्म के है हमारे भी ।
 तो कुछ तो हमारा भी फर्ज है कि हम अपना फर्ज निभाये धर्म के नाम को कलंकित न करके घर मे रहे..इस तरह से ही देश के हित में कुछ काम कर ले।

#घर मे रहे सुरक्षित रहे
       जय हिंद

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